हड़प्पा संस्कृति-सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़े 20 हैरान करने वाले रोचक तथ्य | Indus Valley Civilization in Hindi

सिन्धु घाटी सभ्यता ( हड़प्पा संस्कृति ) का इतिहास 8000 साल पुराना है जिनमे से कई सारे शहरों की खोज हो चुकी है जो की प्राचीन भारत के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए थे और आज इसके कुछ हिस्से पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी पाए गये हैं।

इस सभ्यता की सबसे खास बात यह है की यह दूसरी सभ्यताओं की तुलना में तकनीकी रूप से बहुत आगे थे। आज हम हड़प्पा सभ्यता से जुडी कुछ ऐसे ही रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे जो की आपको सोंचने पर मजबूर कर देंगे की क्या सच में उस जमाने में भी ऐसा हुआ करता था।

Amazing Facts about Indus Valley Civilization in Hindi

ये हैं सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़े 20 हैरान करने वाले आश्चर्यजनक और रोचक तथ्य। इनमे से कुछ बातों पर आपको यकीन करना मुश्किल होगा क्योंकि उस समय की तुलना में वहां के लोगों की जीवन शैली और तकनीकें काफी उन्नत थीं।

1. सबसे पुरानी सभ्यता 


पहले यह माना जाता था की सबसे पुरानी सभ्यता मेसोपोटामिया है लेकिन हाल ही में आईआईटी-खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे सबूतों का खुलासा किया है जिससे की यह साबित होता है की सिंधु घाटी की सभ्यता 5,500 वर्ष (जैसा की पहले माना गया था) नही बल्कि कम से कम 8000 साल पुरानी है।

25 मई, 2016 को प्रतिष्ठित Nature Journal पत्रिका में प्रकाशित इस खोज में माना गया है की मिस्र और मेसोपोटामिया सभ्यताओं की तुलना में ही नही बल्कि हड़प्पा सभ्यता पूरी दुनिया में सबसे पुरानी सभ्यता है।


2. इनकी आबादी 50 लाख से भी अधिक थी


सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) की कुल आबादी पांच लाख से अधिक थी जो की न्यूज़ीलैंड की वर्तमान जनसंख्या की तुलना में अधिक है जिनमे से अधिकांश लोग कारीगर और व्यापारी थे।

3. सभ्यता का नामकरण


खोजी गई पहली बस्तियां सिंधु नदी के तट पर थीं, इसलिए पुरातत्वविदों ने इसे 'सिंधु घाटी सभ्यता' नाम दिया।

हालांकि, सिंधु और इसकी सहायक नदियों के आसपास केवल 100 जगहों पर पाए गये हैं जबकि 500 ​​से ज्यादा साइटों की खोज घग्गर-हकरा नदी (जो की लंबे समय से खोई हुई नदी, सरस्वती मानी जाती है) के आसपास हुई है। 

अब, कई पुरातत्वविदों ने इसे 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' के रूप में बुलाना पसंद किया है, जो की दोनो नदियों के नाम पर आधारित है।
जबकि कई लोग 'हड़प्पा सभ्यता' नाम को पसंद करते हैं, जो पहले शहर के नाम पर आधारित था जिसे हड़प्पा कहते हैं।

4. अब तक 1056 शहरों की खोज हो चुकी है


अभी तक 1,056 से अधिक हड़प्पा शहर और बस्तियों की खोज हुई है, जिनमें से 96 जगहों की खुदाई की गई है। वे ज्यादातर सिंधु और घग्गर-हकरा नदियों और उनकी सहायक नदियों के आसपास फैले हुए हैं। जिनमे ढोलवरिया, राखीगढ़ी, लोथल, कालीबंगन हड़प्पा और मोहनजो-दारो जैसे कुछ प्रसिद्ध शहर भी शामिल हैं।

5. बच्चों का शहर


जब हड़प्पा और मोहन जोदड़ो की खुदाई की गयी थी, तो वहां पासा, पत्थर, सीटी और कई प्रकार के खिलौने बड़ी संख्या में पाए गए थे। इससे उन्हें लगा कि उन्होंने उन शहरों की खोज की थी जहां के अधिकांश निवासी बच्चे थे।

6. उस जमाने में शतरंज जैसा खेल


जैसा की हमने ऊपर बताया की वहाँ कई प्रकार के खिलौने पाए गये हैं जिससे पता चलता है की वहाँ के लोगों को खेल खेलना बहुत पसंद था लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की शतरंज जैसा खेल भी उस जमाने में खेला जाता था।

7. 4000 वर्षीय सिंधु घाटी ईंटों से बना रेलवे ट्रैक

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान, ब्रिटिश इंजीनियर कराची से लाहौर तक रेलवे ट्रैक का निर्माण कर रहे थे। जब ट्रैक बढ़ाने के लिए सामग्रियों की कमी महसूस हुई, तो उन्होंने इसके लिए हड़प्पा के आसपास के खंडहरों से ईंटें एकत्रित कीं। उन्होंने इन 4000 वर्ष पुरानी ईंटों का उपयोग करके 150 किमी रेलवे ट्रैक का निर्माण किया।

8. दुनिया का पहला योजनाबद्ध शहर

Mohenjodaro-town-planning

सिन्धु घाटी के लगभग सभी शहर योजनाबद्ध तरीके से एक ग्रिड पैटर्न में डिजाईन किये गये हैं। सड़कों की दिशा और चौड़ाई का ख़ास ख्याल रखा गया था, सड़कों के आसपास बाजार और अन्य दुकानों आदि के लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था थी।

9. वे अपने समय से आगे थे

सिन्धु घाटी सभ्यता में शहरों और गावों का निर्माण बेहद ही योजनाबद्ध तरीके से किया गया था जो उस समय के दूसरी प्राचीन सभ्यताओं में दिखाई नही देते।

 लगभग सभी शहर एक ही पद्धति से बनाई गई थी। टाउन प्लानिंग अकेले शहरों तक सीमित नहीं थी, प्रत्येक शहर और गांव एक ही ग्रिड पैटर्न से बने थे और प्रत्येक घर का निर्माण एक ही आकार के ईंट से होता था। सभी घरों के लिए ईंटें समान थीं। जल निकासी और प्रबंधन के लिए भी विशेष व्यवस्था की गयी थी।

10. अधिकांश घर दो मंजिला या तीन मंजिला होते थे

sindhu-ghati-houses

हड़प्पा सभ्यता के लोगों के पास कुशल राजमिस्त्री हुआ करते थे जो की ईंटों को जोड़कर विशाल संरचना बना सकते थे यही कारण है की लोगों के घर दो मंजिला या तीन मंजिला हुआ करते थे।

11. हड़प्पा घरों में अटैच्ड बाथरूम व फ्लश टॉयलेट हुआ करते थे 

Harrapan-toilet
हड़प्पा संस्कृति के लगभग सभी घरों में पानी की सुविधा के साथ उस समय के अनुसार अत्याधुनिक स्नानागार और शौचालय होते थे जिनमे निकासी और साफ़ सफाई की भी विशेष व्यवस्था की गयी थी।

12. विशाल स्नानागार 

Great-Bath-Mohenjo-Daro

मोहन जोदड़ो की खुदाई में एक विशाल स्नानागार पाया गया है। यह 2.5 मीटर गहरा, 7 मीटर लम्बा और चौड़ा था। प्रवेश द्वार के रूप में दो चौड़े सीढ़ियां थीं, तालाब में एक छेद भी है जहां से पानी निकलता है। सभी दीवारों को जिप्सम प्लास्टर के साथ पतले ईंटों और मिट्टी से बनाया गया था। 

13. दुनिया के पहले दंत चिकित्सक

Indus-Valley-Dental-Drill

भले हमें आज दन्त चिकित्सा जैसा कार्य आधुनिक और नये जमाने का लगे लेकिन आपको यह जानकर बड़ी हैरानी होगी की हड़प्पा काल से कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जो बताते हैं की उस समय में भी लोगों की इसकी जानकारी थी।

सन 2001 में, मेहरगढ़, पाकिस्तान के दो लोगों के अवशेषों का अध्ययन करने वाले पुरातत्वविदों ने पाया कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग, शुरुआती हरप्पन काल से ही आद्य-दंत चिकित्सा (proto-dentistry) के ज्ञानी थे।

Nature Journal में प्रकाशित लेख के अनुसार मेहरगढ़ में एक जीवित व्यक्ति में मानव दांतों के ड्रिलिंग का पहला सबूत पाया गया था।

14. उन्होंने नाप-तौल की सटीक तकनीक भी विकसित की थी 

वैज्ञानिकों ने उस समय उपयोग होने वाले कुछ माप यंत्रों की खोज की है जिनका उपयोग लम्बाई नापने, वजन तौलने आदि में किया जाता था। नाप-तौल के कई मानक भी निर्धारित किये गये थे, 0.005 इंच को सटीकता से नापा जा सकता था।

यही नही, पुरातत्वविदों को कुछ पत्थर के क्यूब्स भी मिले हैं जो की स्पष्ट रूप से वजन तौलने के लिए तैयार किये गये हैं, जिनसे 0.05 से लेकर 500 यूनिट तक के भार को तौला जा सकता है।

15. मोहन जोदड़ो में सड़कों व गलियों में कूड़ेदान की व्यवस्था थी 

पुरातत्वविदों ने ईंट से बने कई कंटेनरों की पहचान की जो की कचड़े इक्कठे करने के लिए मोहनजो-डारो की गलियों में लगाए गये थे।

16. हड़प्पा सभ्यता में बटन का भी उपयोग होता था

Harappan-button-indus-valley

सिंधु घाटी सभ्यता में, समुद्री सीपों से बने बटन का उपयोग ज्यादातर सजावटी सामग्री के रूप में किए जाते थे। बटनों को अलग-अलग आकृतियों में बनाया गया था और धागे के साथ कपड़ों में इसे लगाने के लिए इसमें छेद भी दिए गये थे।

17. उन्होंने दुनिया का सबसे पुराना साइनबोर्ड बनाया

1999 में ढोलवीरा में, पुरातत्वविदों ने दुनिया का पहला साइनबोर्ड खोजा है, इस बोर्ड में एक लकड़ी के फ्रेम में 30 सेंटीमीटर के पत्थर से बने प्रतीक चिन्ह थे। हांलाकि अभी तक इसके मतलब का पता नही चल पाया है क्योंकि सिंधु लिपि की अभी तक व्याख्या नहीं की गई है।

18. उनको कला और शिल्प के क्षेत्र में महारथ हासिल थी


Harappan civilization के लोग शिल्पकला के मामले में बहुत उन्नत थे, खनन के दौरान सिन्धु घाटी से ताम्बे, कांस जैसे कई प्रकार के धातुओं से बनी मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ पाई गयीं हैं जिनमे उनके शिल्प कौशल को बड़ी आसानी से देखा जा सकता है।

19. सिन्धु सभ्यता की लिपि (Indus Valley Script) को अभी तक समझा नही जा सका है

हड़प्पा संस्कृति में उपयोग किये गये लिपि व लिखावट की व्याख्या अभी तक नही की जा सकी है यह भी एक वजह की हमें सिन्धु घाटी के बारे बहुत कम जान पाए हैं।

20. आज भी यह रहस्य है कि सिंधु घाटी सभ्यता कैसे ख़तम हो गई

इस सभ्यता की समाप्ति के पीछे का रहस्य आज भी बना हुआ है। कोई भी नही जानता की उन नागरिकों का क्या हुआ। कुछ लोग कहते हैं कि उनकी सैन्य रणनीतियों की कमी के कारण मध्य एशिया से भारत-यूरोपीय जनजाति के आर्यों ने उन पर हमला किया। 

कुछ लोगों का यह कहना है कि यह एक बड़े पैमाने पर सूखे की वजह खत्म हो गई। वहीँ कुछ लोगों का मानना ​​है कि एक बहुत बड़े भूकंप ने नदी के मार्ग को बदल दिया, और इस तरह परिस्थिति ने उन्हें कहीं और स्थानांतरित होने के लिए मजबूर किया।